मेरी रोशनी
अपनी अलग पहचान के साथ, बारीकी से आसपास पर नज़र रखने की समझ रखते हैं। दूसरों से छूटी मामूली भाव-भंगिमा या माहौल की महीन धारा तक भांप लेते हैं और ज़रूरत के पल में चुपचाप हाथ बढ़ाते हैं। जल्दबाज़ी न करने वाली फुरसत, संयम और गहरी सूझ की वजह से साथ रहने पर एक अजीब भरोसा महसूस होता है।
सच्चाई की रोशनी
छोटी-छोटी एक्सप्रेशन तक पकड़ लेना थका देने वाला भी हो सकता है, आँख-नज़र से ही सब भाँप लेना असल में थकान भरा रवैया है। ज़रूरत न हो तब भी आगे बढ़ जाना जितनी दखलंदाज़ी है, संयम रखते-रखते मन की बात जितनी अनदेखी करते चले जाते हो।
सच्चाई की रोशनी थोड़ी तीखी है। तैयार हैं तो तीन बार खटखटाइए।